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पदावली
(३) पंडित बाद बदलते................................. जमपुरी जासी
प्रसंग== इस पद में कबीरदास जी कहते हैं कि राम के नाम का जप करने से संसार में किसी व्यक्ति का उद्यान नहीं हो सकता वास्तव में यह कर्म ही प्रधान है
व्याख्या==कबीरदास जी कहते हैं कि पंडित व्यर्थ ही झूठा उपदेश देते हैं यदि राम कहने से संसार को मुक्ति नहीं मिल जाती है; तो खाँड़ कहने से भी मुंह मीठा हो जाना चाहिए था यदि अग्नि कहने से पांव जल जाए ;जल कहने से प्यास बुझ जाए, भोजन करने से भूख भाग जाए, तब तो दुनिया में सभी तरह जाएं, किंतु ऐसा नहीं होता। ना खाँड़ कहने से मुंह मीठा होता है, न आग कहने से पाव जलता है न जल कहने से प्यास बुझती है और न भोजन कहने से भूख भागती है। अतः राम कहने से भी मुक्ति नहीं मिल सकती। आदमी के पढ़ने से तोता उसके साथ-साथ राम-राम रखता है, किंतु वही भगवान के प्रताप को नहीं जानता। जंगल में उड़ जाने पर उसे याद नहीं करता। उसे राम का ध्यान भी नहीं आता। इसी प्रकार भगवान के सच्चे स्वरूप को न पहचाने के कारण व्यक्ति उसी विस्मृत कर बैठता है। कबीरदास जी कहते हैं कि जो लोग विशय -वासनाओ एवं माया की सच्ची प्रीति रखते हैं। और भगवान के भक्तों की हंसी उड़ाते हैं। जिनके हृदय में भगवान के प्रति सच्चा प्रेम उत्पन्न नहीं हुआ है। यह यमपुरी अर्थात नरक में पहुंचेंगे उनकी मुक्ति कदापि संभव नहीं है
विशेष==(1)कबीर दास जी के अनुमान अनुसार नाम जप की अपेक्षा भगवान के प्रति प्रेम की सच्ची उपवास है
शीर्षक विनोद गौतम

Hii friends padabali kahani kaisi hai
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